Tuesday, December 16, 2008

जब से मुझे प्यार हुआ है

Hi all , Back again now a days I am thinking alot about my life and offcourse about Sushi.

डूबा रहता हूँ सदा तेरे ख्यालो मे,
जबसे मुझे तुमसे प्यार हुआ है,
आँखे है तेरी एक झलक को प्यासी,
जबसे मुझको तेरा इंतजार हुआ है,
नीद गायब है उस दिन से मेरी आँखों से,
जिस दिन से मुझे तेरा दीदार हुआ है,
खुदा की बन्दगी छोड़ बैठा हूँ,
जबसे तुझपे एतबार हुआ है,
सुनना चाहता हूँ बस तेरी ही बातें,
जबसे मुझे इकरार हुआ है,
कुछ खो दिया है मैंने शायद ,
जबसे ये दिल तुझपे निसार हुआ है ,
तुम हो मेरे और सिर्फ़ मेरे ,
इस बात का दिल को यकीं बार बार हुआ है.


-----------------ललित कुमार पटेल १७/१२/०८

Friday, December 12, 2008

M. Tech का चक्कर

Hi all, Nowadays I am busy in preparing my M. Tech project report. It has been about one and half year since my project started. Here are few lines in this regards....

जाने कहाँ मेरी किस्मत फूटी ,
मिल गई मुश्किलो की लड़ी,
कोसता हूँ उस घड़ी को रात दिन,
जिस घडी पड़ी M.Tech की हथकडी,
हुई है साँप छूछन्दर की हालत,
लगती है ये कोई आफत बड़ी,
ये पूरा होने का नाम नही लेती,
मानो हो ये बीरबल की खिचडी,
लगता है नही है ये इंशा की बस की,
इसके लिए चहिए कोई जादू की छड़ी।



................................ललित कुमार पटेल १२/१२/०८

Wednesday, December 10, 2008

Visit to my home town - Kadipur

Hi all
back again after a such a long time. Last week I was in my home town to attend my sister's marraige. There I found a number of women singing desi folk song. I was quite surpised when I come to know that those women who are barely educated sing very well . It was very nice experience to listen those song having a special kind of music. I wish if I could have remembered all those songs.




...........................lalit kumar patel 10/12/2008

Saturday, September 27, 2008

तुम

Hi all back again. Here are few lines.....


मै तो हूँ तेरी हर एक बात का मुरीद ,
तेरा प्यार ही नही तेरी नफरते भी सही,
जिन्दा हूँ बस एक तेरे ही सहारे,
तू नही तो तुझसे मिलने की हसरते ही सही,
ख्वायिश है तू रहे मेरे सामने हरदम,
तेरी ना सही ये मेरी जरूरते ही सही।

......................ललित कुमार पटेल २९/०९/०९





Friday, September 12, 2008

तोंद

Hi ... back again For the last few week i am very anxious about my bulging out stomach. Here are few lines in this regard...

देखकर अपनी बढ़ी हुई तोद,
मन में आया ये ख्याल ,
जैसे कद्दू गया हो चिपकाया लगाकर गोद,
सोचा था की body बनाऊगा ,
पर इस तोद ने दिया सारे अरमानो को रौद ....


...............******...................


.......................ललित कुमार पटेल १३/०९/०८

Wednesday, August 27, 2008

हो ना हो ये तुम हो

Hi all, this post is only for Sushma ..............

बेचैन है दिल कैसी ये बेकरारी है ,
हो ना हो ये आग तुमने ही लगाई है,
मिलने का कुछ तो करो जतन,
अब नही बर्दास्त ये लम्बी जुदाई है,
क्यो घिर आई है घटा आज नभ में ,
कही तुमने अपनी जुल्फे तो नही लहराई है ,
कैसी मादक खुशबू है हवाओ में ,
जरूर ये तुमको ही छुकर आई है,
कोयले क्यो है इतना मीठा बोलती,
बोलना इनको तुने ही सिखाई है,
मोर है क्यो इतना इतरा के चलता क्या है तुम्हे पता ,
थोडी सी खूबसूरती उसने तुमसे ही चुराई है,
क्यों हर कली है आज मेहरबा मुझपे ,
मेरे बारे में सोच कर कही तुमने पलके तो नही झुकाई है,
चाँद क्यो है आज मायूस सा खड़ा,
जरूर तुमने अपने मुखड़े की झलक उसको दिखाई है,
क्यो फिजा है आज पागल सी ,
जरूर उसने तुमसे ही नजरे मिलाई है,
तुम्हे पाकर ऐसा लगता है मुझको,
दोनों जहाँ की खुशिया मैंने बड़े सस्ते में पाई है,
मैंने खुदा से आज साफ कह दिया,
जन्नत के बदले भी मंजूर नही तुझसे बेवफाई है.
सबसे अच्छी है मेरी Sushi,
ये बात मैंने सबको डंके की चोट पे बताई है,
मेरी जिंदगी में न जाने कब से था पतझड़,
तुम्हारे आने से मानो बहारे फिर से लौट आई है,
मेरा वजूद अब मुझमे कुछ भी न रहा,
क्योकि अब मेरे जर्रे जर्रे में तू ही समाई है,
तुझे देखकर न जाने क्यों ऐसा लगता है मुझको,
कुदरत ने अपनी बेपनाह मुहब्बत तुझमे ही छुपाई है.....
तू मिले हर जनम में मुझे इस बात के लिए,
भगवान् के घर अभी से अर्जी लगाई है,
जागता हूँ रात भर तेरी याद में ,
ये आखें यू ही नही सूज आई है,
क्यों छाई है लालिमा अम्बर पे आज,
मुझको याद कर जरूर तू आज लजाई है,
डूबा रहता हूँ सदा तेरे ख्यालो में,
तेरे बिन मेरी जिंदगी मानो कैद तनहाई है,


------------to be continued.....

------------------ललित कुमार पटेल २७-०८-०८

Monday, August 25, 2008

यादें

Hi all, these are farewell wishes for our friends.

आपकी यादें है हमारे लिए अमूल्य धरोहर ,
जिसे हम रखेगे सहेज कर उम्र भर,
देते है हम विदा आपको दग्ध ह्रदय होकर,
कामना है आपको जीवन में मिले खुशिया जी भर कर।

------------*****----------
-------ललित कुमार पटेल २५-०८-०८

कामना

Hi all, back again.Following lines are written for well wishes for our seneior defence personals.


आपके जीवन का हर पल कुछ ख़ास रहे,
आपके होठो पे सदा एक मधुर हास रहे,
आपके जीवन में सदा हर्सोल्लास रहे,
खुशिया आपके जीवन में बेहिसाब रहे,
आपकी यादें सदा हमारे आस पास रहे,
आपको भी सदैव हमारे होने का एहसास रहे,
आपसे दुबारा मिलने की दिल में आस रहे।

-----------******--------------

-----ललित कुमार पटेल २५-०८-०८

Sunday, August 10, 2008

तुम हो कौन

Hi all, back again. Here is one of my poem. I don't know why it came into my mind.


हूँ मै स्तंभित ,
ह्रदय है व्यथित,
किया मुझे विचलित,
भंग हुआ भीतर का मौन,
अजनबी तुम हो कौन,
तुम आए हो क्या करने ?
धर माया रूप मुझको छलने ?
मेरे ह्रदय को मुझसे हरने,
या फिर जीवन में कुछ रंग भरने,
संग अपने न जाने क्या लाये हो ?
प्रेम सुधा ज्यों भर लाये हो ,
तो फिर स्वीकार है मुझे तुम्हारा आमन्त्रण,
क्या तुम्हे भी स्वीकार है मेरा समर्पण ?
----------***----------------

------------------------ललित कुमार पटेल ११/०८/०८

Sunday, August 3, 2008

पहाड़ और बादल

Hi all, I am sitting in my office. It is raining out there. Clouds are wondering around mountain.
I am wondering what they are doing over there. Here are few lines in this regard.


ये बादल जो आए है पहाड़ पर ढल कर,
मानो खेल रहे हो लुकाछिपी मिलकर,
इस सुंदर दृश्य को इस तरह माने ,
बादल जैसे कह रहे हो पहाड़ से पकडो तो जाने ,
पहाड़ जो है धरती माँ का सबसे बड़ा बेटा,
सदियों से है इसी तरह आलसी सा लेटा,
उसको खेलना कब है भाया ,
उसने अपना जीवन है सोने में बिताया,
पच्छियो के कोलाहल है उसका रोष जताना ,
अम्बर की लालिमा है उसका गुस्से से लाल होना,
और धरती माँ बिजली की चमक में अपनी मुस्कुराहट छुपाती ,
गरज गरज कर है कभी कभी बादलो को डराती ,
बादलो ने भी आज हठ करने की ठानी है,
पहाड़ को भिगोने की जिद कर ठानी है,
पहाड़ ने भी कब हार मानी है,
धरती माँ ने उस पर हरी छतरी जो तानी है।


....................****..............
ललित कुमार पटेल

Sunday, July 27, 2008

आतंकवाद

Hi all,
It is very sad that so many terror activities are going there in our country. Is there no means to counteract these activities.


चारो तरफ है फैला आतंक का जाल,
कैसे कोई रखे अपने आप को सम्हाल,
ये मनुष्य है प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ जीव,
अब तक जो नही पाया मिलजुलकर रहना सीख,
आज के समय का है ये यथार्थ,
मनुष्य से लिपटा हुआ है स्वार्थ,
आज मानव किस प्रगति की राह पे जा रहा,
मनुष्य को मनुष्य ही है यहाँ खा रहा,
जब तक मनुष्य अपने स्वार्थ और घृणा को नही जाएगा भूल,
तब तक आतंकवाद का चुभता रहेगा ये दर्दनाक शूल,
आओ हम सब मिल कर आतंकवाद की जड़े काटे,
आओ हम सब अपना सुख दुःख आपस में बाटें

------------***--------------
ललित कुमार पटेल २८/०७/08

Thursday, July 24, 2008

सावन

It is raining out there. I am sitting in my office looking outside through window. I wish I would have been playing amid this rain shower.


आया सावन,
सबका मन भावन,
चारो ओर है फैली हरियाली,
झूम रहा हर पत्ता पत्ता , डाली डाली,
देखो नाच रहा है मोर,
दादुर मचा रहे है शोर,
बादल चाचा जाग गए,
सूरज दादा भाग गए,
धीमे धीमे है पड़ रही फुहार,
चहू ओर फैली खुशियाँ अपार।
------------------ललित कुमार पटेल २५/०७/08

Tuesday, July 22, 2008

Phone Problem

Yesterday night I saw that my phone SMS memory is almost full.This inspire me to write this poem(or whatever you like to call it). Altough it it is merely a Tukbandi but I found it was quite tricky to find appropiate words. So enjoy ....

तुम्हारे प्यार की आहट पाकर मेरा सब कुछ हिल गया,
फ़ोन ही नही दिल का भी रिंगटोन बदल गया,
दिमाग का inbox और outbox सब भर गया,
फ़ोन का बिल देखकर ये दिल डर गया,
अब तो ये फ़ोन धीरे धीरे vibrate होने लगा,
दिल भी बिना कुछ कहे ही librate होने लगा,
दिमाग की हालत जैसे पाक मे परवेज हो गया,
तुम्हारा फ़ोन जब से out of कवरेज हो गया,
मैंने कहा या खुदा अब बस कर ज़ुल्मो सितम,
message आया तुम्हारी validity है अब खतम,

----------------------------ललित कुमार पटेल २३/०८/०८

Thursday, July 17, 2008

मजाक करना मजाक नही

Hi all,

Yesterday there was a lecture on topic "मजाक करना मजाक नही " in our BARC. Here I have written few lines in this context.

मजाक करना आसान नही होता,
होठो पे हँसी है तो क्या हुआ ,
दिल अपने दर्द से अनजान नही होता,
मिल गए होते गर तुम पहले,
दिल दर्द से यू बेजान नही होता,
इन्शानियत न बचती इस जहाँ में कहीं पर ,
गर इंसान पल भर का यहाँ मेहमान नही होता,
दूसरो को मुस्कराते देख खुशी होती है इस दिल को,
वरना किसी के मुस्कराने से किसी पे एहसान नही होता,
बाँटता गर हर कोई अपनी थोडी सी खुशी,
दुनिया में फिर कोई दर्द से परेशान नही होता।


-------------------ललित कुमार पटेल १७/०७/08

Wednesday, July 9, 2008

अपनी बात

Hi all,

Back again. May be you have heard it somewhere.But I have written it to express my own feelings.

न कोई शिकवा आपसे न कोई गिला रहे ,
आरजू है बस इतनी कि एक सिलसिला रहे,
दोस्ती की जो सौगात जो अपने दी है वो नही है कम ,
फिर भी दिल की है तमन्ना अब न कोई फासला रहे,
दूरिया हो कितनी हमारे दरमिया नही कोई ग़म ,
बस आपसे मिलने की दिल में हौसला रहे,
मुश्किलें जिंदगी की मिलजुल कर सह लेगे हम,
फक्त जरूरत है कि हमारा दिल मिला रहे।

--------------------ललित कुमार पटेल १०/०७/०८

Sunday, July 6, 2008

सुषमा के लिए

Hi
This post is for Sushma only . Anyone else please read it at your own risk.
This is not written by me.
मिलेगे अहबाब से तुफैल की बदीद से तर जाऊँगा,
उम्र की कैद से छूटूगा तो घर जाऊँगा,
जिन्दगी बीत गई तेरी महफिल में पर ये समझ ना आया,
तेरी महफिल से ऊँठूगा तो किधर जाऊँगा,
जाने क्यो इस बात का दिल को यकीन है मेरे ,
एक नजर तेरी पड़ी तो सँवर जाऊँगा,
तश्गनी धूप की शिद्त की गर हद से आगे बढ़ी ,
तेरी आँखों की समंदर में उतर जाँऊगा.
---------- writer तुफैल
------------ ललित पटेल

साथ

Hi all,
Yesterday night Vineet wished me to have a good night and told me to write a poem in my dream.

विनीत कहता है तुम रात में लिखो ,
अपने समय की हर बात पे लिखो ,
भीग जाए तन मन जिसकी बारिस में ,
ऐसी हर खुशी की बरसात पे लिखो,
तोड़ दे जो पुरानी रूढ़ियो को ,
हर उस ज़हीन पाक हाथ पे लिखो,
करीब लाये जो लोगो के दिलो को,
हर उस मुकम्मल साथ पे लिखो ,
रह गई जो दबकर भीड़ में,
ऐसी हर अनसुनी फरियाद पे लिखो.
----------------ललित कुमार पटेल ०७/०७/2008

Thursday, July 3, 2008

महंगाई

प्लेटो में पड़े समोसो को देखकर
मैंने दुकानदार से पूछा,
साहब, आपका समोसा है कच्चा,
साइज़ में लगता है ये समोसे का बच्चा,
दुकानदार गरमाया,
अपनी बढ़ी हुई तोंद को और फुलाया,
क्या समझा है मुझे टुच्चा,
जो मिल रहा है वो लेलो बच्चा,
ये मेरा नही महंगाई की है करामात,
जिससे ख़राब है सबके हालात,
अब तो मुझे हो रहा है ये आभास ,
वो दिन दूर नही जब खाना नही उसकी फोटो देखकर मिटानी पड़ेगी भूख प्यास,
मैंने छोड़ी अपनी रोकी हुई साँस,
समोसो को देखा लगाकर आस,
सोचा हो महंगाई का सत्यानास।

---------------------ललित कुमार पटेल ०३/०७/०८

Wednesday, July 2, 2008

अकेला

Hi all,
This is not written by me but I had heard it from somewhere.

भीड़ में रहता हूँ सुनसान के सहारे ,
जैसे कोई मन्दिर हो गाँव के किनारे,
मिलने को मिलता रहा जमाना ,
पर कोई ऐसा नही मिला जो प्यार से पुकारे।
-------lalit kumar patel 3/07/08

भगवान् से

बसे हुए तुम कण कण मे फिर मै ढंढू तुम्हे कहाँ ,
भरके हाथो को प्रेम पुष्प से अध्यॅ दे सकूँ तुम्हे ज़हाँ
--------- lalit Kumar patel 2/07/08

Monday, June 30, 2008

दहेज़

ये जो मिला है तुम्हे दहेज़ ,
जिसे तुम रहे इतना सहेज,
इस नस्वर संसार में एक दिन सब कुछ नष्ट हो जाएगा ,
तुम्हारे सपनों का संसार तुम्हारे साथ ही खो जाएगा।
---------ललित कुमार पटेल ३०/६/०८

Sunday, June 29, 2008

दोस्तों से

क्या हुआ जो शादी हुई समझो तो अभी भी कुवारा हूँ मै,
तुम्हारा वही हँसता खेलता ललित दुलारा हूँ मै,
क्या हुआ जो नए रिश्ते बने,
पर दिल से अभी भी तुम्हारे प्यार का मारा हूँ मै,
मिलना बिछुड़ना तो लगा ही रहता है,
पर किसी की जिंदगी का अब सहारा हूँ मै,
उन लम्हों की याद अभी भी है ताजा ,
जिन लम्हों को तुम्हारे साथ दोस्तों गुजारा हूँ मै,
मत समझो ये दोस्ती यही खत्म हुई ,
दिल से ,ऐ मेरे दोस्तों अभी भी तुम्हारा हूँ मै।
-------------ललित कुमार पटेल ३०/६/०८

माता पिता के प्रति

ऐ मेरे प्यारे माता पिता ,
करू कैसे तुम्हारे गुणों का वर्णन,
नही कुछ ऐसा इस संसार में,
जो कर सकू तुम्हे अर्पण,
तुम्ही मेरे जीवन का मूल सर्वस्व ,
तुम्ही में समाया मेरा समस्त विश्व ,
अब तो बस यही है प्रार्थना ऐ ईश्वर मेरे ,
हर जन्म में तुम्ही बनो माता पिता मेरे।
-----ललित कुमार पटेल ३०/६/०८

ये किताबें

ये किताबें हमेशा कुछ देती ,
नही कुछ लेती ,
हमारे संस्कारो को सेती ,
हमारे विचारो को बनाती ,
हमारे चरित्र को सवांरती ,
ये किताबें , जिनमे संचित है ज्ञान के भंडार ,
जो है प्रकृति का मानव को सर्वश्रेठ उपहार ,
जिनमे रचित है हमारे पूर्वज़ो के उद्गगार ,
ये किताबें जो है छल कपट से दूर ,
है ये इस सभ्यता का नूर ,
ये किताबें , है हमारा सर्वश्रेठ धन ,
करो इनको अपना नमन अर्पण.


........... ललित कुमार पटेल ३०/०६/08

Saturday, June 28, 2008

बचपन की यादें

Hi
Back again. As I am going to be married soon.
Here is one of my poem in memory of my childhood.





याद है सब कुछ ,
वो मम्मी का सुबह को जल्दी उठाना,
वो जल्दी जल्दी में चीजो का हाथ से गिराना,
वो
स्लेटो से आपस में मारा मारी करना,
वो नहाये न होने पर टीचर से मार खाने से डरना,
वो कलम के लीए नरकट के पेडो को तोड़ना,
वो गेद के लीए एक एक पैसे जोड़ना ,
वो स्याही और दवात के बदले चीजो का बदलना,
वो पचीस पैसे में लेमनचूस खरीदना,
वो दस रुपये होने पर अपने आप को अमीर समझना,
वो अमरद और आवला की चोरी करना,
वो इमली के लिए आपस में लड़ना,
वो पेड़ पर उचाई तक चड़ना,
वो दोस्तों के साथ कंचे , लुका छिपी और गुल्ली डंडा खेलना,
वो खेल में एक दूसरे को हराना,
वो मम्मी का भूतो से डराना,
वो गलती करने पर जाकर चुपचाप पढ़ने लगना,
वो गर्मी की छुट्टियों में दोपहर को घर से भागना,
वो रात में picture के लीये जागना,
वो घर से बचकर T.V. देखना ,
वो जब प्यार से सब 'लल्लू' बुलाते थे ,
वो जब किसी के घर बे रोकटोक जा सकते थे,
अभी कल ही की बात तो लगती है,
कुछ छूट गया ऐसा जान पड़ती है,
कहाँ गया वो मेरा बचपन ,
कहाँ गया वो मेरा छुटपन,
कहाँ गया वो ज़माने का प्यार,
वो लोगो का अपनापन ,
अब जिन्दगी में नही कुछ विशेष है,
बस यादें ही शेष है।
-------ललित कुमार पटेल 28-06-08

Friday, June 27, 2008

God is there

Don't fear,
God is with you right there,
Also His soothing bells everywhere,
Just hear.
Devoid of His virtue and mercy,
Such place exists nowhere,
Look the beauty and charm surrounding your neighbor,
So have a Trust on Him,
Your all doubts would be clear,
So enjoy His blessing,
Be good and cheer.

.............Lalit Kumar Patel

Tuesday, June 24, 2008

My Photo with hair


Although rare ..
But it's my photo with hair!
which I have kept with care!
and yes it's quite good and fare !
That's why I want to show you with dare!
So enjoy.. your happiness and share !!

Wednesday, April 23, 2008

try to do some useful work

For the last three days,I am unable to do some useful work. Although I am trying hard but all my efforts are fruitless.Lets have a fresh start.

lalit

Tuesday, January 29, 2008

New post


Today 29 Jan I opened this blog. I am feeling sleepy today. May be this is due to late night awakening.

Sunday, January 27, 2008

Hi

I am lalit Kumar Patel