Hi all, I am sitting in my office. It is raining out there. Clouds are wondering around mountain.
I am wondering what they are doing over there. Here are few lines in this regard.
ये बादल जो आए है पहाड़ पर ढल कर,
मानो खेल रहे हो लुकाछिपी मिलकर,
इस सुंदर दृश्य को इस तरह माने ,
बादल जैसे कह रहे हो पहाड़ से पकडो तो जाने ,
पहाड़ जो है धरती माँ का सबसे बड़ा बेटा,
सदियों से है इसी तरह आलसी सा लेटा,
उसको खेलना कब है भाया ,
उसने अपना जीवन है सोने में बिताया,
पच्छियो के कोलाहल है उसका रोष जताना ,
अम्बर की लालिमा है उसका गुस्से से लाल होना,
और धरती माँ बिजली की चमक में अपनी मुस्कुराहट छुपाती ,
गरज गरज कर है कभी कभी बादलो को डराती ,
बादलो ने भी आज हठ करने की ठानी है,
पहाड़ को भिगोने की जिद कर ठानी है,
पहाड़ ने भी कब हार मानी है,
धरती माँ ने उस पर हरी छतरी जो तानी है।
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ललित कुमार पटेल
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