Hi all, this post is only for Sushma ..............
बेचैन है दिल कैसी ये बेकरारी है ,
हो ना हो ये आग तुमने ही लगाई है,
मिलने का कुछ तो करो जतन,
अब नही बर्दास्त ये लम्बी जुदाई है,
क्यो घिर आई है घटा आज नभ में ,
कही तुमने अपनी जुल्फे तो नही लहराई है ,
कैसी मादक खुशबू है हवाओ में ,
जरूर ये तुमको ही छुकर आई है,
कोयले क्यो है इतना मीठा बोलती,
बोलना इनको तुने ही सिखाई है,
मोर है क्यो इतना इतरा के चलता क्या है तुम्हे पता ,
थोडी सी खूबसूरती उसने तुमसे ही चुराई है,
क्यों हर कली है आज मेहरबा मुझपे ,
मेरे बारे में सोच कर कही तुमने पलके तो नही झुकाई है,
चाँद क्यो है आज मायूस सा खड़ा,
जरूर तुमने अपने मुखड़े की झलक उसको दिखाई है,
क्यो फिजा है आज पागल सी ,
जरूर उसने तुमसे ही नजरे मिलाई है,
तुम्हे पाकर ऐसा लगता है मुझको,
दोनों जहाँ की खुशिया मैंने बड़े सस्ते में पाई है,
मैंने खुदा से आज साफ कह दिया,
जन्नत के बदले भी मंजूर नही तुझसे बेवफाई है.
सबसे अच्छी है मेरी Sushi,
ये बात मैंने सबको डंके की चोट पे बताई है,
मेरी जिंदगी में न जाने कब से था पतझड़,
तुम्हारे आने से मानो बहारे फिर से लौट आई है,
मेरा वजूद अब मुझमे कुछ भी न रहा,
क्योकि अब मेरे जर्रे जर्रे में तू ही समाई है,
तुझे देखकर न जाने क्यों ऐसा लगता है मुझको,
कुदरत ने अपनी बेपनाह मुहब्बत तुझमे ही छुपाई है.....
तू मिले हर जनम में मुझे इस बात के लिए,
भगवान् के घर अभी से अर्जी लगाई है,
जागता हूँ रात भर तेरी याद में ,
ये आखें यू ही नही सूज आई है,
क्यों छाई है लालिमा अम्बर पे आज,
मुझको याद कर जरूर तू आज लजाई है,
डूबा रहता हूँ सदा तेरे ख्यालो में,
तेरे बिन मेरी जिंदगी मानो कैद तनहाई है,
------------to be continued.....
------------------ललित कुमार पटेल २७-०८-०८
Here you can read short poems expressing my personal feelings about this material world.
Wednesday, August 27, 2008
Monday, August 25, 2008
यादें
Hi all, these are farewell wishes for our friends.
आपकी यादें है हमारे लिए अमूल्य धरोहर ,
जिसे हम रखेगे सहेज कर उम्र भर,
देते है हम विदा आपको दग्ध ह्रदय होकर,
कामना है आपको जीवन में मिले खुशिया जी भर कर।
------------*****----------
-------ललित कुमार पटेल २५-०८-०८
आपकी यादें है हमारे लिए अमूल्य धरोहर ,
जिसे हम रखेगे सहेज कर उम्र भर,
देते है हम विदा आपको दग्ध ह्रदय होकर,
कामना है आपको जीवन में मिले खुशिया जी भर कर।
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-------ललित कुमार पटेल २५-०८-०८
कामना
Hi all, back again.Following lines are written for well wishes for our seneior defence personals.
आपके जीवन का हर पल कुछ ख़ास रहे,
आपके होठो पे सदा एक मधुर हास रहे,
आपके जीवन में सदा हर्सोल्लास रहे,
खुशिया आपके जीवन में बेहिसाब रहे,
आपकी यादें सदा हमारे आस पास रहे,
आपको भी सदैव हमारे होने का एहसास रहे,
आपसे दुबारा मिलने की दिल में आस रहे।
-----------******--------------
-----ललित कुमार पटेल २५-०८-०८
आपके जीवन का हर पल कुछ ख़ास रहे,
आपके होठो पे सदा एक मधुर हास रहे,
आपके जीवन में सदा हर्सोल्लास रहे,
खुशिया आपके जीवन में बेहिसाब रहे,
आपकी यादें सदा हमारे आस पास रहे,
आपको भी सदैव हमारे होने का एहसास रहे,
आपसे दुबारा मिलने की दिल में आस रहे।
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-----ललित कुमार पटेल २५-०८-०८
Sunday, August 10, 2008
तुम हो कौन
Hi all, back again. Here is one of my poem. I don't know why it came into my mind.
हूँ मै स्तंभित ,
ह्रदय है व्यथित,
किया मुझे विचलित,
भंग हुआ भीतर का मौन,
अजनबी तुम हो कौन,
तुम आए हो क्या करने ?
धर माया रूप मुझको छलने ?
मेरे ह्रदय को मुझसे हरने,
या फिर जीवन में कुछ रंग भरने,
संग अपने न जाने क्या लाये हो ?
प्रेम सुधा ज्यों भर लाये हो ,
तो फिर स्वीकार है मुझे तुम्हारा आमन्त्रण,
क्या तुम्हे भी स्वीकार है मेरा समर्पण ?
----------***----------------
------------------------ललित कुमार पटेल ११/०८/०८
हूँ मै स्तंभित ,
ह्रदय है व्यथित,
किया मुझे विचलित,
भंग हुआ भीतर का मौन,
अजनबी तुम हो कौन,
तुम आए हो क्या करने ?
धर माया रूप मुझको छलने ?
मेरे ह्रदय को मुझसे हरने,
या फिर जीवन में कुछ रंग भरने,
संग अपने न जाने क्या लाये हो ?
प्रेम सुधा ज्यों भर लाये हो ,
तो फिर स्वीकार है मुझे तुम्हारा आमन्त्रण,
क्या तुम्हे भी स्वीकार है मेरा समर्पण ?
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------------------------ललित कुमार पटेल ११/०८/०८
Sunday, August 3, 2008
पहाड़ और बादल
Hi all, I am sitting in my office. It is raining out there. Clouds are wondering around mountain.
I am wondering what they are doing over there. Here are few lines in this regard.
ये बादल जो आए है पहाड़ पर ढल कर,
मानो खेल रहे हो लुकाछिपी मिलकर,
इस सुंदर दृश्य को इस तरह माने ,
बादल जैसे कह रहे हो पहाड़ से पकडो तो जाने ,
पहाड़ जो है धरती माँ का सबसे बड़ा बेटा,
सदियों से है इसी तरह आलसी सा लेटा,
उसको खेलना कब है भाया ,
उसने अपना जीवन है सोने में बिताया,
पच्छियो के कोलाहल है उसका रोष जताना ,
अम्बर की लालिमा है उसका गुस्से से लाल होना,
और धरती माँ बिजली की चमक में अपनी मुस्कुराहट छुपाती ,
गरज गरज कर है कभी कभी बादलो को डराती ,
बादलो ने भी आज हठ करने की ठानी है,
पहाड़ को भिगोने की जिद कर ठानी है,
पहाड़ ने भी कब हार मानी है,
धरती माँ ने उस पर हरी छतरी जो तानी है।
....................****..............
ललित कुमार पटेल
I am wondering what they are doing over there. Here are few lines in this regard.
ये बादल जो आए है पहाड़ पर ढल कर,
मानो खेल रहे हो लुकाछिपी मिलकर,
इस सुंदर दृश्य को इस तरह माने ,
बादल जैसे कह रहे हो पहाड़ से पकडो तो जाने ,
पहाड़ जो है धरती माँ का सबसे बड़ा बेटा,
सदियों से है इसी तरह आलसी सा लेटा,
उसको खेलना कब है भाया ,
उसने अपना जीवन है सोने में बिताया,
पच्छियो के कोलाहल है उसका रोष जताना ,
अम्बर की लालिमा है उसका गुस्से से लाल होना,
और धरती माँ बिजली की चमक में अपनी मुस्कुराहट छुपाती ,
गरज गरज कर है कभी कभी बादलो को डराती ,
बादलो ने भी आज हठ करने की ठानी है,
पहाड़ को भिगोने की जिद कर ठानी है,
पहाड़ ने भी कब हार मानी है,
धरती माँ ने उस पर हरी छतरी जो तानी है।
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ललित कुमार पटेल
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