Wednesday, July 9, 2008

अपनी बात

Hi all,

Back again. May be you have heard it somewhere.But I have written it to express my own feelings.

न कोई शिकवा आपसे न कोई गिला रहे ,
आरजू है बस इतनी कि एक सिलसिला रहे,
दोस्ती की जो सौगात जो अपने दी है वो नही है कम ,
फिर भी दिल की है तमन्ना अब न कोई फासला रहे,
दूरिया हो कितनी हमारे दरमिया नही कोई ग़म ,
बस आपसे मिलने की दिल में हौसला रहे,
मुश्किलें जिंदगी की मिलजुल कर सह लेगे हम,
फक्त जरूरत है कि हमारा दिल मिला रहे।

--------------------ललित कुमार पटेल १०/०७/०८

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