Hi all,
It is very sad that so many terror activities are going there in our country. Is there no means to counteract these activities.
चारो तरफ है फैला आतंक का जाल,
कैसे कोई रखे अपने आप को सम्हाल,
ये मनुष्य है प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ जीव,
अब तक जो नही पाया मिलजुलकर रहना सीख,
आज के समय का है ये यथार्थ,
मनुष्य से लिपटा हुआ है स्वार्थ,
आज मानव किस प्रगति की राह पे जा रहा,
मनुष्य को मनुष्य ही है यहाँ खा रहा,
जब तक मनुष्य अपने स्वार्थ और घृणा को नही जाएगा भूल,
तब तक आतंकवाद का चुभता रहेगा ये दर्दनाक शूल,
आओ हम सब मिल कर आतंकवाद की जड़े काटे,
आओ हम सब अपना सुख दुःख आपस में बाटें।
------------***--------------
ललित कुमार पटेल २८/०७/08
No comments:
Post a Comment