प्लेटो में पड़े समोसो को देखकर
मैंने दुकानदार से पूछा,
साहब, आपका समोसा है कच्चा,
साइज़ में लगता है ये समोसे का बच्चा,
दुकानदार गरमाया,
अपनी बढ़ी हुई तोंद को और फुलाया,
क्या समझा है मुझे टुच्चा,
जो मिल रहा है वो लेलो बच्चा,
ये मेरा नही महंगाई की है करामात,
जिससे ख़राब है सबके हालात,
अब तो मुझे हो रहा है ये आभास ,
वो दिन दूर नही जब खाना नही उसकी फोटो देखकर मिटानी पड़ेगी भूख प्यास,
मैंने छोड़ी अपनी रोकी हुई साँस,
समोसो को देखा लगाकर आस,
सोचा हो महंगाई का सत्यानास।
---------------------ललित कुमार पटेल ०३/०७/०८
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