Monday, June 30, 2008

दहेज़

ये जो मिला है तुम्हे दहेज़ ,
जिसे तुम रहे इतना सहेज,
इस नस्वर संसार में एक दिन सब कुछ नष्ट हो जाएगा ,
तुम्हारे सपनों का संसार तुम्हारे साथ ही खो जाएगा।
---------ललित कुमार पटेल ३०/६/०८

Sunday, June 29, 2008

दोस्तों से

क्या हुआ जो शादी हुई समझो तो अभी भी कुवारा हूँ मै,
तुम्हारा वही हँसता खेलता ललित दुलारा हूँ मै,
क्या हुआ जो नए रिश्ते बने,
पर दिल से अभी भी तुम्हारे प्यार का मारा हूँ मै,
मिलना बिछुड़ना तो लगा ही रहता है,
पर किसी की जिंदगी का अब सहारा हूँ मै,
उन लम्हों की याद अभी भी है ताजा ,
जिन लम्हों को तुम्हारे साथ दोस्तों गुजारा हूँ मै,
मत समझो ये दोस्ती यही खत्म हुई ,
दिल से ,ऐ मेरे दोस्तों अभी भी तुम्हारा हूँ मै।
-------------ललित कुमार पटेल ३०/६/०८

माता पिता के प्रति

ऐ मेरे प्यारे माता पिता ,
करू कैसे तुम्हारे गुणों का वर्णन,
नही कुछ ऐसा इस संसार में,
जो कर सकू तुम्हे अर्पण,
तुम्ही मेरे जीवन का मूल सर्वस्व ,
तुम्ही में समाया मेरा समस्त विश्व ,
अब तो बस यही है प्रार्थना ऐ ईश्वर मेरे ,
हर जन्म में तुम्ही बनो माता पिता मेरे।
-----ललित कुमार पटेल ३०/६/०८

ये किताबें

ये किताबें हमेशा कुछ देती ,
नही कुछ लेती ,
हमारे संस्कारो को सेती ,
हमारे विचारो को बनाती ,
हमारे चरित्र को सवांरती ,
ये किताबें , जिनमे संचित है ज्ञान के भंडार ,
जो है प्रकृति का मानव को सर्वश्रेठ उपहार ,
जिनमे रचित है हमारे पूर्वज़ो के उद्गगार ,
ये किताबें जो है छल कपट से दूर ,
है ये इस सभ्यता का नूर ,
ये किताबें , है हमारा सर्वश्रेठ धन ,
करो इनको अपना नमन अर्पण.


........... ललित कुमार पटेल ३०/०६/08

Saturday, June 28, 2008

बचपन की यादें

Hi
Back again. As I am going to be married soon.
Here is one of my poem in memory of my childhood.





याद है सब कुछ ,
वो मम्मी का सुबह को जल्दी उठाना,
वो जल्दी जल्दी में चीजो का हाथ से गिराना,
वो
स्लेटो से आपस में मारा मारी करना,
वो नहाये न होने पर टीचर से मार खाने से डरना,
वो कलम के लीए नरकट के पेडो को तोड़ना,
वो गेद के लीए एक एक पैसे जोड़ना ,
वो स्याही और दवात के बदले चीजो का बदलना,
वो पचीस पैसे में लेमनचूस खरीदना,
वो दस रुपये होने पर अपने आप को अमीर समझना,
वो अमरद और आवला की चोरी करना,
वो इमली के लिए आपस में लड़ना,
वो पेड़ पर उचाई तक चड़ना,
वो दोस्तों के साथ कंचे , लुका छिपी और गुल्ली डंडा खेलना,
वो खेल में एक दूसरे को हराना,
वो मम्मी का भूतो से डराना,
वो गलती करने पर जाकर चुपचाप पढ़ने लगना,
वो गर्मी की छुट्टियों में दोपहर को घर से भागना,
वो रात में picture के लीये जागना,
वो घर से बचकर T.V. देखना ,
वो जब प्यार से सब 'लल्लू' बुलाते थे ,
वो जब किसी के घर बे रोकटोक जा सकते थे,
अभी कल ही की बात तो लगती है,
कुछ छूट गया ऐसा जान पड़ती है,
कहाँ गया वो मेरा बचपन ,
कहाँ गया वो मेरा छुटपन,
कहाँ गया वो ज़माने का प्यार,
वो लोगो का अपनापन ,
अब जिन्दगी में नही कुछ विशेष है,
बस यादें ही शेष है।
-------ललित कुमार पटेल 28-06-08

Friday, June 27, 2008

God is there

Don't fear,
God is with you right there,
Also His soothing bells everywhere,
Just hear.
Devoid of His virtue and mercy,
Such place exists nowhere,
Look the beauty and charm surrounding your neighbor,
So have a Trust on Him,
Your all doubts would be clear,
So enjoy His blessing,
Be good and cheer.

.............Lalit Kumar Patel

Tuesday, June 24, 2008

My Photo with hair


Although rare ..
But it's my photo with hair!
which I have kept with care!
and yes it's quite good and fare !
That's why I want to show you with dare!
So enjoy.. your happiness and share !!